गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई
नमस्कार दोस्तों, मैं महेश कुमार। अट्ठाईस साल का। सरकारी नौकरी करता हूँ। मेरी सारी कहानियाँ पूरी तरह काल्पनिक हैं भैया-भाभी के घर आने के बाद मकान छोटा पड़ने लगा था। मैं ड्राइंग रूम में सो रहा था और रात भर पायल भाभी की आवाजें सुन-सुनकर लंड पर हाथ फिरता रहता था। तभी पापा ने गाँव जाने को कह दिया। रामेसर चाचा फसल कटाने और पुराना मकान देखने के लिए बुला रहे थे। मन तो नहीं था, लेकिन पायल भाभी को न पा सकने की जलन से अच्छा गाँव ही लगा। अगले दिन बस पकड़कर निकल पड़ा। गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई
शाम को गाँव पहुँचा। आँगन में चाची जी ने गले लगाया। चाचा जी हँस पड़े। सुमन द्वार पर खड़ी मुस्कुरा रही थी। और फिर आईं रेखा भाभी।
रेखा भाभी… सत्ताईस-अट्ठाईस की। गोरा चमकदार चेहरा, काले घने बाल, और बॉडी ऐसी कि देखकर लंड खुद-ब-खुद खड़ा हो जाए। लंबी गोल जांघें, पतली कमर, और पीछे की तरफ भारी-भरकम गोल गंड जो साड़ी के नीचे से भी अपना आकार दिखा रही थी। आगे उनकी चूचियाँ इतनी भारी और entari हुई थीं कि ब्लाउज के बटन तनाव में नजर आ रहे थे। साड़ी की पल्लू बार-बार सरक जाती और उनकी गहरी ब्लाउज की गर्दन से चूचियों का ऊपरी नरम हिस्सा झलक जाता। गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई
खाना परोसते समय रेखा भाभी जब झुकतीं तो उनकी भारी चूचियाँ ब्लाउज के अंदर से आगे को धकेलती हुई नजर आतीं। पीछे से उनकी गंड का गोल उभार साड़ी में सिमटा हुआ था। मैं बार-बार निगल रहा था। लंड पैजामे में तन चुका था।
रात को सोने का इंतजाम हुआ। जगह कम होने की वजह से मुझे रेखा भाभी के ही कमरे में सोना पड़ा। दो चारपाई बिल्कुल पास-पास। रेखा भाभी रसोई में काम निपटा रही थीं। मैं लेटा-लेटा इंतजार कर रहा था।
तभी दरवाजा खुला। रेखा भाभी नहाकर अंदर आईं।
बाल खुले गीले कंधों पर बिखरे हुए। शरीर पर सिर्फ हल्की गुलाबी ब्रा और सफेद पतला पेटीकोट। ब्रा के पतले कपड़े उनके भारी चूचियों को मुश्किल से समेट पा रहे थे। चूचियों के गोल-गोल आकार और काले निप्पल्स के उभरे हुए निशान साफ दिख रहे थे। ब्रा के ऊपर से चूचियों का नरम ऊपरी मांस लहरा रहा था। पेटीकोट गीला होने की वजह से उनकी मोटी-मोटी जांघों और गंड से चिपक गया था। पीछे से उनकी गंड का भारी गोल आकार पूरा साफ नजर आ रहा था। दो बड़े-बड़े मुलायम गोले जो हर कदम पर हल्के से कांप रहे थे। आगे पेटीकोट के नीचे उनकी चूत की हल्की रेखा भी उभर आई थी।
मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। लंड एकदम तनकर पैजामे में दर्द करने लगा। रेखा भाभी ने मेरी तरफ देखा। उनकी नजर सीधे मेरे पैजामे के उभार पर गई। वे हल्की मुस्कुराईं और बत्ती बुझा दी।
अँधेरे में चाँदनी आ रही थी। मैं करवट लेकर उनकी तरफ मुड़ा। थोड़ी देर बाद मैंने हाथ बढ़ाया। पहले उनकी जांघ छुई। नरम, गरम। फिर हाथ और ऊपर ले गया। पेटीकोट खिसकाया। उनकी नंगी गंड मेरे हाथ में आ गई। इतनी नरम, इतनी गोल और भारी कि मेरी हथेली में पूरी नहीं समा रही थी। मैंने उनके गंड के दोनों भागों को मसलना शुरू कर दिया। रेखा भाभी की साँस तेज हो गई। उन्होंने पैर थोड़े फैला दिए।
मैं उनकी चारपाई पर चढ़ गया। पेटीकोट पूरी तरह ऊपर सरका दिया। चाँदनी में उनकी नंगी गंड और चूत चमक रही थी। गंड के बीच से उनकी चूत के मोटे गीले होठ नजर आ रहे थे। मैंने दोनों हाथों से उनकी गंड के गोले फैलाए और जीभ उनकी चूत पर लपका दी। गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई
“आह्ह्ह… महेश…” रेखा भाभी की कमर उछल गई।
मैं उनकी चूत चाटने लगा। जीभ अंदर तक घुसेड़ दी। साथ ही दोनों हाथों से उनकी भारी गंड को मसलता रहा। रेखा भाभी के चूचे ब्रा के अंदर से बाहर आने को बेताब थे। मैंने ब्रा ऊपर सरकाई। उनकी भारी, नरम, काले निप्पल वाली चूचियाँ बाहर छलक आईं। मैंने एक चूचे को मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरे को हाथ से मसलने लगा। निप्पल मुँह में और सख्त हो गया।
रेखा भाभी पागल हो रही थीं। “चूस… जोर से चूस मेरे चूचे… और नीचे भी… मेरी चूत चूस साले…”
मैंने उनकी चूचियों को काट-काट कर चूसा और फिर वापस उनकी चूत पर मुँह लगा दिया। जीभ और उंगलियों से उनकी चूत को इतना कुचला कि वे काँपते हुए जोर से झड़ गईं। उनकी चूत से पानी मेरे मुँह पर छलकने लगा।
अब मैंने अपना पैजामा उतारा। लंड तना हुआ, नसों से भरा, मुँह से पानी टपका रहा था। रेखा भाभी ने लंड पकड़ लिया और मुँह में ले लिया। उनके गरम मुँह में लंड जाते ही मजा आ गया। वे गहराई तक ले जाकर चूस रही थीं। लार उनकी चूचियों पर टपक रही थी।
थोड़ी देर बाद वे लेट गईं। पैर फैला दिए। मैंने उनके दोनों गंड के गोले हाथों में लिए और लंड उनकी भीगी चूत पर टिकाया। एक जोर का धक्का मारा। लंड उनकी टाइट चूत में अंत तक धंस गया। गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई
“आआआह्ह्ह… फट गई… इतना मोटा लंड…” रेखा भाभी चीख सि रही थीं।
मैं धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर उनकी भारी चूचियाँ उछल-उछल कर मेरे सीने से टकरा रही थीं। उनकी गंड मेरे हाथों में आकर मसल रही थी। मैंने उनकी गंड के दोनों भागों को फैलाकर और गहराई तक लंड घुसेड़ना शुरू कर दिया। थप-थप-थप की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी।
“जोर से चोद… मेरी गंड पकड़कर चोद… मेरे चूचे काट…” रेखा भाभी पागलों की तरह कराह रही थीं।
मैंने उनके एक चूचे को मुँह में लिया और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उनकी चूत इतनी रसीली और टाइट थी कि लंड बार-बार निकलने को मजबूर हो रहा था। अचानक रेखा भाभी का शरीर तन गया। वे जोर से काँपीं और फिर से झड़ गईं। उनकी चूत ने लंड को इतना दबाया कि मैं भी नहीं रुक पाया। लंड धड़क-धड़क कर उनकी कोख में पूरा वीर्य उड़ेलने लगा।
मैं उनके ऊपर गिरा रहा। उनकी गीली चूचियाँ मेरे सीने से चिपक रही थीं। गंड अभी भी मेरे हाथों में थी। रेखा भाभी ने हांफते हुए कहा, “अब हर रात… मेरी चूचियाँ और गंड दोनों तेरे लिए हैं। लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए।”
मैंने फिर से हल्के धक्के शुरू कर दिए। लंड अभी भी सख्त था। उस रात मैंने उनकी चूचियों को चूस-चूस कर लाल कर दिया। उनकी गंड को इतना मसला कि सुबह के निशान पड़ गए। तीन बार चुदाई हुई। आखिरी बार रेखा भाभी खुद मेरे ऊपर चढ़ीं। उनकी भारी चूचियाँ मेरे चेहरे पर लटक रही थीं और वे अपनी गंड को ऊपर-नीचे करके लंड को अपनी चूत में पटक रही थीं। गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई
सुबह चार बजे हमने कपड़े ठीक किए। रेखा भाभी ने ब्रा और पेटीकोट फिर से पहन लिया। लेकिन उनकी चूचियों पर मेरे दांतों के निशान और गंड पर मेरे हाथों की लालिमा अभी भी थी।
अगली सुबह जब मैं चाय पी रहा था तो सुमन मेरे पास आई। “कल रात कमरे से अजीब आवाजें आ रही थीं… सब ठीक है ना?”
मेरा दिल धक् से रह गया। लेकिन मैंने मुस्कुराते हुए कह दिया, “नीम की पत्तियाँ थीं।”
सुमन चली गई। लेकिन उसकी नजर में शक साफ था।
रेखा भाभी रसोई से निकलीं। साड़ी पहने हुई थीं, लेकिन ब्लाउज थोड़ा टाइट था। उनकी चूचियाँ ब्लाउज में जोर से धंसी हुई नजर आ रही थीं। पीछे से गंड का उभार पहले से ज्यादा सेक्सी लग रहा था। उन्होंने मेरी तरफ देखकर आँख मार दी और धीरे से बोलीं, “आज रात फिर से… मेरी चूचियाँ तेरे मुँह का इंतजार कर रही हैं।”गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई
मेरा लंड तुरंत तन गया।
गाँव की ये रातें अब सिर्फ चुदाई की रातें बनने वाली थीं… रेखा भाभी की रसीली चूचियों और नरम गंड के साथ।
अगर आपका प्यार मिलेगा तो मैं गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई दूसरा भाग जरूर लिखूंगा जिसमें आपको पता लगेगा कि गांव की भाभी कितना मजा दे सकती है और इसका लिंक में इसके नीचे दे दूंगा
Agla Episode aa gya hai Aur uska link :- गांव वाली विधवा भाभी की चुदाई–2
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